Wednesday, 19 October 2016

खुद पे जो  इतरा रहा था कल चंदा  इतना 
आज उसकी भी बेकद्री   हैं 
 सच ही है हर सुबह की एक सांझ होनी है 

Friday, 14 October 2016

The eternity

when the wrinkles on my cheek shall define my age
when my lips may not hold yours 
when the roses bring more joy  than romance 

when i walk and my pace does not match yours
when i am more on repairing my flaws

when my trembling hand may not grip your fingers 
when your touch does not cause the sizzlers...

will you my love then.............


still kiss me?
still hold me?
still sit by my side?
still stroll with me?
still watch the sun set at the beach? 

will your love still take me to the 7th sky? 

cause love is what I believe not with age, skin and  beauty 
but its for eternity 


Thursday, 22 September 2016

चाय की अभिलाषा

चाह  नहीं की मैं कैफ़े डे में  ही रोज़ जाऊ ,
चाह नहीं की चायोस में जाकर फालतू का बिल बढ़ाऊ !!

चाह नहीं की स्टारबकस में बैठ अपने भाग्य पे इतराऊं !

मुझे ले जाना अये  दोस्त बिठा देना मुझे वहां ,
 कुल्लहड़ की चाय पीने,  जाते हो चाय के प्यासे
लोग अनेक जहाँ !!


Thursday, 15 September 2016

Life is beautiful ?

A cup in hand , thought in mind
     Memories  that couldn't resist to unwind

Different shades, trace  of  pinks and tinge of  grays
     Few Rains Drops and Bright  Sunny Rays 

Life is beautiful, all convey 
  I humbly accept ... what more do I say? 
    
     

Thursday, 1 September 2016

तू और तेरा संसार

अपरिचित सा रूप इस  संसार का
मौजो को ठहरते और भावनायो को बहते देखा !

जुग्नुयों को जगमगाते तो  सितारों को बुझते देखा
इंसानो को जलते और ठंडी लाशो को सजते देखा !

इन आँखों ने ये गजब   ही रूप संसार  का देखा !


Wednesday, 24 August 2016

फ़ना हो गए रेत्  पे नाम लिखने वाले 
इस  आबिद  का फ़साना तो  आबे ऐ ज़ार से लिखा जायेगा !
इश्क़  के जलजले में उफान  की जी हुज़ूरी है, 
तेरी मौजूदगी का एहसास इस कदर जरुरी है !!


Monday, 22 August 2016

आँखों के आगोश में सिर्फ अश्क़ रह गए है अब
   ख्वाबो को दफनाए काफ़ी वक़्त बीत गया


चले सब्ज़ी मंडी

कई लोग मंडी तब जाते है जब बाज़ार  उठ रहा हो ,
जब  दुकानदार को जल्दी हो निपटाने  की और घर जाने की !

अपने लगाए दामो पर झोली भर,  अपने होशियारी पे इतराते है
  आज सौदा अच्छा रहा ये सोच कुछ और  छोटे हुए  जाते है। ..

वही लोग  अक्सर बड़े दुकानों में ठगे जाते है और  मुस्कुराते है
इस भ्रम में की वह  कुछ और  बड़े हुए जाते है

अजीब ही दस्तूर अजीब ही संस्कार , अजीन ही व्यवहार  :)

Sunday, 21 August 2016

बे फज़ूल

कुछ ऐसा आज ख्याल आया,
अपनी  चाहतो को तवायफों सा सजाने का !

जो हो निसार सही कीमत लगाने वाले पे, 
बे फज़ूल तो काफी लुटा  दिया ! 


मिनाक्षी 







Monday, 1 August 2016

थक जाओ जब

जो खुद से नाराज़ होना तुम कभी ,
हमसे दो शब्द बतिया लेना


 थक जाओ जब जेठ की तपती  धुप से 
तो अमवा की गाछी में सुस्ता लेना

उलझ जाओ गर  ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव में
तो समय से उसको सुलझवा लेना

आगे बढ्ने की जल्दी में  निकल जाओ जब सबसे आगे
और  हम जब  रह जाये कुछ पीछे

प्यार का वास्ता  देकर हमको फिर बुलवा लेना

जब तनहा पड़  जाओ भीड़ में भी, तब हमसे दो शब्द बतिया लेना



Tuesday, 26 July 2016

कहानी !

सुलगते चूल्हे में  सिंकती थी उसकी रोटियां और उम्र 
गिनती से चालीस  !
 तीन  बेटियां और एक बेटे की  माँ की है ये कहानी !

आधे कलछुल और पूरी भरी आँखों से परोसती रही 
थोड़ा दुलार और आत्मग्लान 

औरत  गहना  है घर का 
माँ ने उसको यही सिखाया था 

गिरवी पड़ा था  वो  आज  रिवाज़ों के बाजार में 



Tuesday, 17 May 2016

रहमत

कुछ इतनी तो रहमत कुदरत ने की होती १!
की ये चोट गैरों ने दी होती !

टीस तो फिर भी उठती इस घाव से
 जुबां से  तब आह तो निकलती !!


उसे कभी महसूस होगा तो जरूर ,
ये फरियाद कभी कबूल तो होगी 

Thursday, 28 April 2016

D.R.O.P.L.E.T.S





He held the colorful balloons in his dry palms, running bare feet on the burning road. 
a step here and a step there, he tried not letting any window panes go untouched . 

Go Green and the cars would run to their destinations , 
and his little fingers would reach to his packet to know the count. 

wiping the droplets on his forehead, he would stretch his legs on the footpath,
dreaming.... .. not of the increasing counts in his pocket, 
but.... 

the sky filled with the colorful balloons,  































इंतज़ार

सूखे  पत्तो की सरसराहट कैसे डसती  होगी उस  शाख  को ,
जिसने  कभी गुलिस्तां  को सजाया था !

पथराई सी आँखे जैसे ढूंढती हो ,
कभी न  लौट  के आने  वाले  उन  परिंदो को !

इंतज़ार है दोनों को , 
एक को फ़िज़ायों  का 
दूजे को  खयालो  का 

Tuesday, 8 March 2016

मशगूल है वह ज़िंदगी की रफ़्तार में !!
और  हम?
 खड़े है यादों की कतार में



आदत


समेटने से भी सिमटती नहीं
एक मजबूरियों की चादर,
और दूसरी, उसकी आदत!!




Wednesday, 24 February 2016

क़र्ज़

परहेज़ नहीं है, इस रूह को खाक में मिलाने से | कुछ क़र्ज़ रह गए है ज़माने के, जो चुकाने है।

Tuesday, 23 February 2016

तुम्हारे लिए

हो इश्क़ में जो गैरत मेरे ,
तो दफ़नाना  तुम इसे वहां , 
                एक  पल के लिए भी तुम्हारे कदम पड़ते हो जहाँ !!

सुस्ता लेना तुम रुक के ज़रा , 
हर थकन को मिल जायेगा सुकून !
हर ज़र्रे में मेरी रूह के,
                              क्योकि बस्ते  हो तुम !!

Saturday, 20 February 2016

इश्क़

ये बेमतलब का इश्क़ भी कमाल का है। 
खुशियों में इज़ाफ़ा हो न हो, अश्कों में बेहिसाब होता है|

मुक़द्दमे चलते है  जज़्बातों  पे ,
और गिरफ्तार अरमान होता है !


Thursday, 18 February 2016

बचपन

 बुझते हुए अरमानो को  सुलगाया मैंने
 पुराने बक्से में  रखी  गुड़िया  को सजाया  मैंने 

घुटने जब छीलते थे गिरने से 
उस  चोट को  आज फिर सहलाया मैंने!

क्यों सयाने हो गए हम इतने 
की आज गिराते  है दुसरो को,
 ये सवाल  खुद ही दुहराया मैंने 

लड़ता  था  उस मीठी गोली के लिए जो 
उस  रूठे मन को आज फिर मनाया मैंने 

दिखा रही है ज़िंदगी जो आईना 
उस सच को आज भरमाया मैंने 

काश सहेज पाते उसे 
जिस बचपन को रोज़ ही गवाया हमने 


Wednesday, 17 February 2016

THREADS

Her fingers crossed between the needles
the  ball rolling down the  feet

she would  knit with more warmth than the wool
to protect many who were yet in cradles

it would wrap on random skin she would not know
but did she care?
she knew that winter was harsh 
and that her dead skin would show. 

with no price tag attached
she would sell in the market 
her love knitted in yarns

the malls are bright no doubt
but you would not find this lady there 
though it shall be full of crowd


   




 


 

Tuesday, 16 February 2016

जन्नत है कहाँ

उस कारीगर ने तो  जन्नत ही बनाया था,
हिंदुस्तान और पाकिस्तान  बना डाला हमने जिसे! 
दिल उसका दुखता है, रक्त कही बहता है जब, 
ईश्वर या रब जिसे कहते है हम !

फकीरो की बस्ती में सुकून है,
और रईसों की हवेली में जूनून,

क्या मौलवी क्या पंडित 
आज कहाँ है ईमान और कहाँ  दस्तूर !




Monday, 15 February 2016

गुरुर

खुद पे गुरुर लिए जो बैठे है 
              कोई बता दे उन्हें ज़रा 
इश्क़ की परख आशिक से होती है 
संगमरमर का ताजमहल भी गवाही देता है शहंशाह की मुहब्बत का 
वरना दफ़न तो मुमताज़ हैं वहां 



 

Tuesday, 9 February 2016

बाबुल

बाबुल


धन धान्य  होता है बाबुल ,
नाज़ों से पालता हैं
बाँहों की गोद  में सुलाता हैं

अपने पलकों में सपने, उसके सजाता है
और जब हम कदम हो जाती है बेटियां
फिर उन्हें
रेशम और फूलों से  सजाता है
हीरे  से स्वारता है
 दे जाती है बदले में अनमोल मोतियाँ
हथेली पे वह बाबुल दुलार से संभालता है.


Sunday, 17 January 2016

बारूद

जल उठा था शहर बारूद के उस धमाके से 
आग की लपटे और काले धुएं में 

शोर था काफी लोगो के कौतूहल का  ,लाशे खामोश थी 
किसी बिन ब्याही का सिंदूर शांत पड़ा था , हाथो में रसीद थी शादी के जोड़े की 
वही कुछ दूर घर का मजदुर छुट्टी प् चूका था हमेशा के लिए ,
सोया था एक माँ का लाडला भी कभी न खुलने वाली नींद में 

दो रोटिया एक टिफ़िन की  बिखरी पड़ी थी 
हक़दार आज  भूखा ही रह गया 

सुबह तो हुई थी इनकी भी 
रात से इनका दर्द देखा न गया 

बड़ी ही शिद्दत से जलाया था शहर  ज़ालिम ने। ... 



Thursday, 14 January 2016

ख्वाइशें

संभाल  के रख दिए तकिये के नीचे  खाइश्ो को  मैंने 
कुछ ख्वाब में पुरे हो  शायद 

ये सोच पलके भी  मूंद  ली 


Wednesday, 13 January 2016

मयखाना

आ जाते हैं मयखाने में लोग
कुछ ग़म मिटाने को
कुछ शाम बिताने को

हमने भी कदम बढ़ाया है
एक  जाम होठों से लगाया है
कुछ घाव पुराने खरोच कर खुद को उकसाया है
कुछ को इसी गहरी शाम में प्यार से दफनाया है.



बंदगी

खरीदार बताते है घाटे का सौदा उसे

जो लापरवाहियां  ले उनकी हमने
सुकून अपना गवां दिया

 वह समझते है इश्क़  जिसे
हमने बंदगी उसे बना लिया