अच्छा है की अब पड़ती नहीं इतनी ठण्ड,
इतनी नहीं की गोइठा और कोयला से आग लगायी जाये ,
इतनी नहीं की उसकी लॉ में हाथ सेंकते समय दादी से बात की जाये
कहा पड़ती है अब इतनी ठण्ड की चूल्हे पे बनी सौंधी रोटियां खायी जाये
न ठण्ड ही है अब ऐसी , न चूल्हा , न दादी
ब्लोअर चलता है अब, और लोग "व्हाट्अप्प "पर व्यस्त होते है। ..
ठण्ड नहीं है इतनी, अपनत्व ठंडा पड़ गया है
मिनाक्षी
इतनी नहीं की गोइठा और कोयला से आग लगायी जाये ,
इतनी नहीं की उसकी लॉ में हाथ सेंकते समय दादी से बात की जाये
कहा पड़ती है अब इतनी ठण्ड की चूल्हे पे बनी सौंधी रोटियां खायी जाये
न ठण्ड ही है अब ऐसी , न चूल्हा , न दादी
ब्लोअर चलता है अब, और लोग "व्हाट्अप्प "पर व्यस्त होते है। ..
ठण्ड नहीं है इतनी, अपनत्व ठंडा पड़ गया है
मिनाक्षी