Thursday, 5 February 2015

तुम

इक प्याली चाय की रखना मेरी भी
जब शाम धुंधली हो 
एक याद मीठी सी 
जब कोरी सी तन्हाई हो 

 बुला लेना  हमें जब
रास्ते थकने लगे 
साथ आ जायेंगे हम। । 

हालात रूठ  गए  जरूर हैं
अपनी हदों  से कुछ यूँ हम  मजबूर जरूर हैं 


दो कदम साथ कभी चले तो थे 
एक कदम बढ़ा लेना तुम 
गर फिसल रहे मेरे हो

एक प्याली चाय की रखना मेरी भी
ये वादा  था तुम्हारा
ये कसम याद रखना  अपनी भी 


ख़्वाब

अब तो ख्वाबो   से ही प्यार  है
क्योकि वह तो होते हो तुम
छलक  तो तब भी आती है   पलकें पर वहां  थाम  लेते हो तुम
थक जाती हूँ उठते सोते ,वहां संभाल  लेते हो तुम
अब तो खवाबो से ही प्यार है
क्योकि वह तो होते हो तुम
रातो ने कभी यूँ न तरसाया मुझे , नींद को कभी  यूँ ना सुलाया मैंने
आज   होश गवांकर कर बेहोशी को जगाया हमने
क्योकि
 वहां तो  होते हो तुम