इक प्याली चाय की रखना मेरी भी
बुला लेना हमें जब
दो कदम साथ कभी चले तो थे
जब शाम धुंधली हो
एक याद मीठी सी
जब कोरी सी तन्हाई हो
बुला लेना हमें जब
रास्ते थकने लगे
साथ आ जायेंगे हम। ।
हालात रूठ गए जरूर हैं
अपनी हदों से कुछ यूँ हम मजबूर जरूर हैं
अपनी हदों से कुछ यूँ हम मजबूर जरूर हैं
दो कदम साथ कभी चले तो थे
एक कदम बढ़ा लेना तुम
गर फिसल रहे मेरे हो
एक प्याली चाय की रखना मेरी भी
ये वादा था तुम्हारा
ये कसम याद रखना अपनी भी
एक प्याली चाय की रखना मेरी भी
ये वादा था तुम्हारा
ये कसम याद रखना अपनी भी