Wednesday, 24 August 2016

फ़ना हो गए रेत्  पे नाम लिखने वाले 
इस  आबिद  का फ़साना तो  आबे ऐ ज़ार से लिखा जायेगा !
इश्क़  के जलजले में उफान  की जी हुज़ूरी है, 
तेरी मौजूदगी का एहसास इस कदर जरुरी है !!


Monday, 22 August 2016

आँखों के आगोश में सिर्फ अश्क़ रह गए है अब
   ख्वाबो को दफनाए काफ़ी वक़्त बीत गया


चले सब्ज़ी मंडी

कई लोग मंडी तब जाते है जब बाज़ार  उठ रहा हो ,
जब  दुकानदार को जल्दी हो निपटाने  की और घर जाने की !

अपने लगाए दामो पर झोली भर,  अपने होशियारी पे इतराते है
  आज सौदा अच्छा रहा ये सोच कुछ और  छोटे हुए  जाते है। ..

वही लोग  अक्सर बड़े दुकानों में ठगे जाते है और  मुस्कुराते है
इस भ्रम में की वह  कुछ और  बड़े हुए जाते है

अजीब ही दस्तूर अजीब ही संस्कार , अजीन ही व्यवहार  :)

Sunday, 21 August 2016

बे फज़ूल

कुछ ऐसा आज ख्याल आया,
अपनी  चाहतो को तवायफों सा सजाने का !

जो हो निसार सही कीमत लगाने वाले पे, 
बे फज़ूल तो काफी लुटा  दिया ! 


मिनाक्षी 







Monday, 1 August 2016

थक जाओ जब

जो खुद से नाराज़ होना तुम कभी ,
हमसे दो शब्द बतिया लेना


 थक जाओ जब जेठ की तपती  धुप से 
तो अमवा की गाछी में सुस्ता लेना

उलझ जाओ गर  ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव में
तो समय से उसको सुलझवा लेना

आगे बढ्ने की जल्दी में  निकल जाओ जब सबसे आगे
और  हम जब  रह जाये कुछ पीछे

प्यार का वास्ता  देकर हमको फिर बुलवा लेना

जब तनहा पड़  जाओ भीड़ में भी, तब हमसे दो शब्द बतिया लेना