Wednesday, 24 February 2016

क़र्ज़

परहेज़ नहीं है, इस रूह को खाक में मिलाने से | कुछ क़र्ज़ रह गए है ज़माने के, जो चुकाने है।

Tuesday, 23 February 2016

तुम्हारे लिए

हो इश्क़ में जो गैरत मेरे ,
तो दफ़नाना  तुम इसे वहां , 
                एक  पल के लिए भी तुम्हारे कदम पड़ते हो जहाँ !!

सुस्ता लेना तुम रुक के ज़रा , 
हर थकन को मिल जायेगा सुकून !
हर ज़र्रे में मेरी रूह के,
                              क्योकि बस्ते  हो तुम !!

Saturday, 20 February 2016

इश्क़

ये बेमतलब का इश्क़ भी कमाल का है। 
खुशियों में इज़ाफ़ा हो न हो, अश्कों में बेहिसाब होता है|

मुक़द्दमे चलते है  जज़्बातों  पे ,
और गिरफ्तार अरमान होता है !


Thursday, 18 February 2016

बचपन

 बुझते हुए अरमानो को  सुलगाया मैंने
 पुराने बक्से में  रखी  गुड़िया  को सजाया  मैंने 

घुटने जब छीलते थे गिरने से 
उस  चोट को  आज फिर सहलाया मैंने!

क्यों सयाने हो गए हम इतने 
की आज गिराते  है दुसरो को,
 ये सवाल  खुद ही दुहराया मैंने 

लड़ता  था  उस मीठी गोली के लिए जो 
उस  रूठे मन को आज फिर मनाया मैंने 

दिखा रही है ज़िंदगी जो आईना 
उस सच को आज भरमाया मैंने 

काश सहेज पाते उसे 
जिस बचपन को रोज़ ही गवाया हमने 


Wednesday, 17 February 2016

THREADS

Her fingers crossed between the needles
the  ball rolling down the  feet

she would  knit with more warmth than the wool
to protect many who were yet in cradles

it would wrap on random skin she would not know
but did she care?
she knew that winter was harsh 
and that her dead skin would show. 

with no price tag attached
she would sell in the market 
her love knitted in yarns

the malls are bright no doubt
but you would not find this lady there 
though it shall be full of crowd


   




 


 

Tuesday, 16 February 2016

जन्नत है कहाँ

उस कारीगर ने तो  जन्नत ही बनाया था,
हिंदुस्तान और पाकिस्तान  बना डाला हमने जिसे! 
दिल उसका दुखता है, रक्त कही बहता है जब, 
ईश्वर या रब जिसे कहते है हम !

फकीरो की बस्ती में सुकून है,
और रईसों की हवेली में जूनून,

क्या मौलवी क्या पंडित 
आज कहाँ है ईमान और कहाँ  दस्तूर !




Monday, 15 February 2016

गुरुर

खुद पे गुरुर लिए जो बैठे है 
              कोई बता दे उन्हें ज़रा 
इश्क़ की परख आशिक से होती है 
संगमरमर का ताजमहल भी गवाही देता है शहंशाह की मुहब्बत का 
वरना दफ़न तो मुमताज़ हैं वहां 



 

Tuesday, 9 February 2016

बाबुल

बाबुल


धन धान्य  होता है बाबुल ,
नाज़ों से पालता हैं
बाँहों की गोद  में सुलाता हैं

अपने पलकों में सपने, उसके सजाता है
और जब हम कदम हो जाती है बेटियां
फिर उन्हें
रेशम और फूलों से  सजाता है
हीरे  से स्वारता है
 दे जाती है बदले में अनमोल मोतियाँ
हथेली पे वह बाबुल दुलार से संभालता है.