Monday, 28 March 2022

गुलाब

 सख्त उंगलिया उसकी नरम से गुलाब की पंखुरियों से लिपटी रहती है दिन भर 

आधे सोये आँखों में उम्मीद चमक जाती है जब  उसका गुलाब नए साफ़ मुलायम उँगलियों में जा सबको  छलता है

 कल फिर नयी सुबह ,नया गुलाब , सख्त हथेलियों में जकड , नरम उँगलियों की तलाश में निकलेगा 


रास्ता हम दोनों का

तुम्हारे शहर से मेरे शहर तक का बस इतना सा सफर है 

मेरी हर गली तुम तक ,  और तुम्हारी हर सड़क  चौराहे तक जाती है !


मेरी हर शाम नुक्कड़  पर यादों  में ढलती है !

तुम्हारी  महफ़िल रोज़ नया साज़ बजाती  है !


रास्ता हम दोनों का  कुछ ऐसा  सा है 

एक पर तुम चलते हो 

एक पर मैं ठहरती हूँ!

 






Sunday, 27 March 2022

                                                                         कुछ छोड देना मेरे पास अपना:*

वो माथे की शिकन यही छोड, अपनी तकदीर ले जाना।

रातों की वो जो दबी सिस्किया सुनी थी मैंने, वो मेरी, और वो सुकून वाली नींद तुम ले जाना ।

चोरी से समय निकाल चाय की चुस्की लेना, वो बातें मेरी, और शामें तुम ले जाना ।

मैंने देखा है तुम्हारा भोलापन और फिर गंभीर हो जाना, वो मासूमियत मेरी और वो बड़े हो जाना तुम ले जाना ।