सख्त उंगलिया उसकी नरम से गुलाब की पंखुरियों से लिपटी रहती है दिन भर
आधे सोये आँखों में उम्मीद चमक जाती है जब उसका गुलाब नए साफ़ मुलायम उँगलियों में जा सबको छलता है
कल फिर नयी सुबह ,नया गुलाब , सख्त हथेलियों में जकड , नरम उँगलियों की तलाश में निकलेगा
सख्त उंगलिया उसकी नरम से गुलाब की पंखुरियों से लिपटी रहती है दिन भर
आधे सोये आँखों में उम्मीद चमक जाती है जब उसका गुलाब नए साफ़ मुलायम उँगलियों में जा सबको छलता है
कल फिर नयी सुबह ,नया गुलाब , सख्त हथेलियों में जकड , नरम उँगलियों की तलाश में निकलेगा
तुम्हारे शहर से मेरे शहर तक का बस इतना सा सफर है
मेरी हर गली तुम तक , और तुम्हारी हर सड़क चौराहे तक जाती है !
मेरी हर शाम नुक्कड़ पर यादों में ढलती है !
तुम्हारी महफ़िल रोज़ नया साज़ बजाती है !
रास्ता हम दोनों का कुछ ऐसा सा है
एक पर तुम चलते हो
एक पर मैं ठहरती हूँ!
कुछ छोड देना मेरे पास अपना:*