Monday, 28 March 2022

रास्ता हम दोनों का

तुम्हारे शहर से मेरे शहर तक का बस इतना सा सफर है 

मेरी हर गली तुम तक ,  और तुम्हारी हर सड़क  चौराहे तक जाती है !


मेरी हर शाम नुक्कड़  पर यादों  में ढलती है !

तुम्हारी  महफ़िल रोज़ नया साज़ बजाती  है !


रास्ता हम दोनों का  कुछ ऐसा  सा है 

एक पर तुम चलते हो 

एक पर मैं ठहरती हूँ!

 






No comments:

Post a Comment