तुम्हारे शहर से मेरे शहर तक का बस इतना सा सफर है
मेरी हर गली तुम तक , और तुम्हारी हर सड़क चौराहे तक जाती है !
मेरी हर शाम नुक्कड़ पर यादों में ढलती है !
तुम्हारी महफ़िल रोज़ नया साज़ बजाती है !
रास्ता हम दोनों का कुछ ऐसा सा है
एक पर तुम चलते हो
एक पर मैं ठहरती हूँ!
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