Sunday, 27 March 2022

                                                                         कुछ छोड देना मेरे पास अपना:*

वो माथे की शिकन यही छोड, अपनी तकदीर ले जाना।

रातों की वो जो दबी सिस्किया सुनी थी मैंने, वो मेरी, और वो सुकून वाली नींद तुम ले जाना ।

चोरी से समय निकाल चाय की चुस्की लेना, वो बातें मेरी, और शामें तुम ले जाना ।

मैंने देखा है तुम्हारा भोलापन और फिर गंभीर हो जाना, वो मासूमियत मेरी और वो बड़े हो जाना तुम ले जाना ।

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