कुछ छोड देना मेरे पास अपना:*
वो माथे की शिकन यही छोड, अपनी तकदीर ले जाना।
रातों की वो जो दबी सिस्किया सुनी थी मैंने, वो मेरी, और वो सुकून वाली नींद तुम ले जाना ।
चोरी से समय निकाल चाय की चुस्की लेना, वो बातें मेरी, और शामें तुम ले जाना ।
मैंने देखा है तुम्हारा भोलापन और फिर गंभीर हो जाना, वो मासूमियत मेरी और वो बड़े हो जाना तुम ले जाना ।
No comments:
Post a Comment