Tuesday, 26 July 2016

कहानी !

सुलगते चूल्हे में  सिंकती थी उसकी रोटियां और उम्र 
गिनती से चालीस  !
 तीन  बेटियां और एक बेटे की  माँ की है ये कहानी !

आधे कलछुल और पूरी भरी आँखों से परोसती रही 
थोड़ा दुलार और आत्मग्लान 

औरत  गहना  है घर का 
माँ ने उसको यही सिखाया था 

गिरवी पड़ा था  वो  आज  रिवाज़ों के बाजार में