Sunday, 16 September 2018

चूड़ियां

कभी  खनकती थी  सतरंगी कलाई जिनसे,
दो टूट गयी उनमे, पहले प्यार की तकरार में !
     
          दो और चूर हुई  बच्चो के  मान और गुहार में !
         
लाल और हरी जो संजोयी थी साज़  के सामान में,
  वह आज बिखरी है खामोश, सफ़ेद सम्मान में!!

मिनाक्षी 

Tuesday, 28 August 2018

मेरा कमरा

मेरा कमरा , कुछ कुछ मे्रे  जैसा ही है  
उसमे रखी है,  किताबे, और कुछ पुरानी डायरी , जिसमे कुछ किस्से नए है, पर बहुत से पुराने   
हाँ वह दिया, मिटटी का , वही रखा है, अब लॉ जलाती नहीं  जिसकी  मैं ,
और  वह  ब्लू वाली  दरी , कितनी ही बार  हटाया  मैंने  उसे , पर आज भी  बिछी  है, वह  बिस्तर के ठीक नीचे। कुछ  चिट्ठियां   अधखुली, पूरी पढ़ी  , मेरे   पसंदीदा  नावेल के बीचोंबीच  दबी  हुई है ! 
कलम दान मेरा भरा हुआ है , कीमती कलमों  से, लोग  समझते है  की मैं लिखने की शौक़ीन हूँ !
हर रात वो  मोमबत्ती  बुझा देती हूँ मैं , क्या लिखू ? यह सोचकर हरबार  स्याही सूखा  देती हूँ !. 
वह  दिवार  वाली घड़ी याद है? कभी कभी  बेवक़्त  ही, पीछे खींच  ले जाती है मुझे , 
मेज़  पर लगा नया कैलेंडर  क्यों  मुझे आज से रूबरू  करा देता है !

रात  जब थक कर दिन के  धोखाधड़ी  से , आँखे बंद करती हूँ  तकिये पर अपनी 
चादर  की  खींचातानी , क्यों  सता  जाती है आज भी 

सपने  में अचानक से   उचककर  जब  जाग जाती हूँ, साथ में रखा गिलास गिर  जाता  है अक्सर ही 
प्यासी  सी  फिर रात  के साथ  सो जाती  हूँ   डरकर !

सवेरे  सब नया होता है, पुराना होता है तो बस  मेरा अक्स , !
वो  आइना  अपने आंचल  से बहुत बार साफ़ किया जिसे मैंने !

उम्र की हर लकीर  मेरे आँखों के नीचे  दिखा देता है 
ढूंढती हूं  जब मैं वो जा काजल का कोर , 
पतंग की टूटी डोर  थमा देता है मुझे   ....

जवाब  तलाशती हूँ मेरी तन्हाईओं  का  .. तो 
सागर की  बेनाम लहरों से मिला देता है मुझे  



समेट कर अपने कमरे का हर कोना 
तैयार हो जाती हूँ कुछ सफ़ेद कुछ काले      ....... 
पलों  को कैद कर कानो के नीचे, 


निकल  पड़ती  हूँ, नया  पन्ना  लिखने  .... रंग   भर जायेंगे इसमें कभी तो... 
इसकी उम्मीद   में स्याही  लाल कर लेती हूँ 

2017

नया दौर है नई उमंगे , अब है नई कहानी
           हम हिंदुस्तानी ,हम हिंदुस्तानी 

बचपन में सुना था ये गाना , अब लगता है काफी पुराना 
न रहा वोः  इंसान और ना ही वह उफान !!


बचपन में घर घर खेलते हुए हमेशा लेडी बनना चाहते थे ,तब खिलौनों से खेलने को मिलता था ,
पता नहीं क्यों तब  किसी ने टोका क्यों नहीं   की लड़के भी खाना बना सकते है और औरते भी  ऑफिस जा सकती है !


बचपन में घर घर खेलते हुए पता नहीं क्यों तब किसी ने टोका क्यों नहीं की लड़के भी खाना बना सकते है और औरते भी ऑफिस जा सकती है



                                                                         IGL  का सामाजिक दायित्व -

IGL और CSRL मिलकर ला रहे है समाज में बदलाव

अपने  बच्चो  के भविष्य  को दीजिये एक नया आकर
क्योकि हम करेंगे उनके सपनो को साकार

१२वी   में पढ़ रहे बच्चे अगर बनना चाहते है इंजीनियर
और पैसे की मज़बूरी बन रही है अरचन

हम देते  है उन्हें एक अवसर ,
११ महीने उन्हें हम करेंगे IIT/JEE के लिए तैयार,
पढाई, रहने  व खाने का खर्च नहीं होगा आप पर एक भार

प्रवेश परीक्षा की जानकारी हेतु संपर्क करे

मिनाक्षी
9711909428 /९७११९०९४२८ / 7042199683 ७०४२१९९६८३
रोहित - 8826190984 /८८२६१९०९८४






एक दो रावण  हमने  भी जला दिए  !
कुछ हाथो में किताब और कुछ आँखों में सपने सजा दिए  !

दादी के साथ छठ के घाट पर जाते जाते ,
साफ़ सुथरे आँगन में  टिकरियों को रात भर बनते देखते हुए
दिए की लौ और धुप से सुगन्धित वातावरण में सूरज को ढलते उगते देखते हुए, छठ को कहीं अपने भीतर ग्रहण कर लिया मैंने.

उसकी पवित्रता उसका महत्त्व कहीं खो न जाये भागते हुए जीवन में , इसी उद्देश्य से ये व्रत मैंने भी रखना शुरू कर दिया , दादी बहुत खुश हुई थी, अब भी नहाय खाये में दादी  का दाल कददू  याद आता है !
खरना के गुड़ की खीर में उनका आर्शीवाद मिलता है. अब माँ और घर वालों के साथ छठ करके उनकी उसी परंपरा को घर में जीवित  रख सकु , हर बार भगवन से ये शक्ति मांगती हूँ।  हमारी आने वाली पीढ़ियों को इस  पवित्र पर्व की परिभाषा हमेशा याद रहे इसकी प्रार्थी हूँ. !

बेटियों के लिए  एक अग्रिम कदम.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को एक कदम और आगे बढ़ाया NTPC  के एक सामाजिक प्रयास ने. 3 नवंबर २०१७ , को  एन  टी पी  सी  और CSRL ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जिसके तहत ये तय किया गया है की NTPC पुरे भारत में अपने कार्यछेत्र के करीबी स्थानों से ३० मेघावी किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों की मदद अपनी परियोजना के माध्यम से करेगा
यह परियोजना इन  ३० लड़कियों को ११ महीने के मुफ्त आवास , खाने व् पढ़ने की सुविधा देगा , इस दौरान इन्हे इंजीनियरिंग के चुनावी परीक्षाओं के लिए तैयार करेगा.

भारत में यह लड़कियों के लिए लिया गया कदम काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. इस परियोजना का सारा कार्यभार CSRL संचालित करेगा. इनके रख रखाव व् सुरक्षा का ख़ास ध्यान दिया जायेगा और इस परियोजना में कार्यरत ज्यादातर  कर्मचारी  महिलाये होंगी.




पुराना वाला साथ साथ चलता है, कुछ कदम , जब तक हम आगे न निकल जाये , टूटे  दिल को नयी  उम्मीद देने कल चमकेगा सूरज फिर , आने तो दो उसकी रौशनी अपने अलसाये  आँखों  पर


स्वतंत्रता सोच की, आगे बढ़ने की, अपना स्थान बनाने की, इस गणतंत्र दिवस पर सबके साथ लेते है ये प्रण


आज आईने में देखा खुद को, वो जो काले अल्लहड़ से उलझ जाया करते थे खयालो में
वही आज सम्भले से सिमटे है , सफ़ेद सा रंग उनका , ४१ सावन बांधे हुए है। .

वह जो चहक जाया करते थे  नयी ताल पर मन
 ढूंढता  है शब्दों को आज के साज़ में अब। ..


तुम झूठे तो नहीं हो कही ,
या मेरी घडी की सूइयां तेज़ हो गयी है



क्षितिज  से जमीं तक जो आये
वही नज़र है ,
जो अंधेरो को चीरकर एक नयी पहर  दे
वही सहर  है

उसके आने का इंतज़ार ही खूबसूरत है
आने के बाद, जाने के डर से

       

Saturday, 10 February 2018

Hum

तू रूठ  जाती है मुझसे
मैं हर बार मना  लेती हूँ  तुझे
ज़िंदगी , बड़ी कीमती सी लगती है, हर लम्हा तू यूँ जब फिसलती है

इंकार नहीं तेरी खुबसुरतियों से
उसके अक्स में क्यों  फिर तुझे ढूंढती हूँ ?

खुद के हौसलों पे यकीन है मुझे
क्यों कर फिर ,हर मोड़ पर पलटकर देख लेती हूँ ?

"मैं " अहम् सा लगता है , "हम " से ही क्यों फिर पूरी हो जाती हूँ

US

Desire do I not of pearls in the Ocean deep
All i wish is days to stay and nights to leap 
     My half empty bed has the habit to tease. 
        
Nor Do i Dream of  palaces and swings 
It dsnt fascinate me to have any bling
   My autumn awaits you in the spring 

The nameplate on door, reads my name
That space below, no one to claim. 


I let my heart flee 
the I in me looks for We.




Wednesday, 10 January 2018

ठण्ड

अच्छा है की अब पड़ती नहीं इतनी ठण्ड,
इतनी नहीं की गोइठा और कोयला से आग लगायी जाये ,
इतनी नहीं की उसकी लॉ में हाथ सेंकते समय दादी से बात  की जाये

कहा पड़ती है अब इतनी ठण्ड की चूल्हे पे बनी सौंधी  रोटियां  खायी जाये
न ठण्ड ही है अब ऐसी , न चूल्हा , न दादी

ब्लोअर चलता है अब, और लोग "व्हाट्अप्प "पर व्यस्त होते है। ..
ठण्ड नहीं है इतनी, अपनत्व ठंडा पड़ गया है


मिनाक्षी