Wednesday, 10 January 2018

ठण्ड

अच्छा है की अब पड़ती नहीं इतनी ठण्ड,
इतनी नहीं की गोइठा और कोयला से आग लगायी जाये ,
इतनी नहीं की उसकी लॉ में हाथ सेंकते समय दादी से बात  की जाये

कहा पड़ती है अब इतनी ठण्ड की चूल्हे पे बनी सौंधी  रोटियां  खायी जाये
न ठण्ड ही है अब ऐसी , न चूल्हा , न दादी

ब्लोअर चलता है अब, और लोग "व्हाट्अप्प "पर व्यस्त होते है। ..
ठण्ड नहीं है इतनी, अपनत्व ठंडा पड़ गया है


मिनाक्षी

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