Saturday, 7 October 2017

छूतअछूत

मंदिर की घंटी बजाते देखा था जिन्हे, वह उस फ़क़ीर के हाथो में सिक्के दूर से फेंक रहे थे

मिनाक्षी


Monday, 28 August 2017

ज़माना दिखावे का

रामचंद्र कह गए सिया से
  ऐसा कलयुग आएगा 

हंसने के लिए पार्क मनुष्य 
और 
रोने के लिए रियलिटी शो में जायेगा !!

जब क्रोध मनुष्य पे छाता है 
वह बिग बॉस के घर जाता है !!

मुँह बिचकाकर मुस्काता है !
और उसपे खुद ही फिर इतराता है !




Friday, 25 August 2017

Social Media


हमारी ज़िंदगी चाहे 2G  क्यों ना हो , सोच की रफ़्तार तो 4G है! 
भारतीय या विदेशी होने से पहले तो हम, सच्चे फेसबूकियाँ हैं !
 बड़े ही जतन से मनाते है हम सारे त्यौहार ,
तिलक या रोली  लगाकर , हम करते हैं अपडेट बार बार 

कलाई पे राखी हो या तीज पे सिंदूर,बिना फेसबुक कहाँ है पूरा दस्तूर 
आज होली हो तो कल  पूरा  रंगीन हो जाता है स्क्रीन 
खुद से ज्यादा   हमें दुसरो के लाइक पर हैं यकीन 

अपने को आईने में कम, कैमेरे में ज्यादा देखते है 
तारीफों के पुल सुनने को हर  लम्हा तरसते है 
लल्ला फर्स्ट  आये तो मिठाई  नहीं , दुनिया की बधाई चाहिए
पड़ोस  के Mrs शर्मा की   रेसेपी भी ऑनलाइन चाहिए  
डाल  कर मेडल का अपडेट , करते हैं  फिर कमैंट्स का वेट  
नब्ज़ की तरह करते है  हम नेट को हर वक़्त चेक 

सोशल मीडिया  का कीड़ा काटा  है कुछ इस कदर
दवा नहीं, दारू नहीं, बस whatsapp  का ग्रीन
करता है हमारी तबियत ठीक !

नाश्ता और चाय, टेबल  पर  नहीं,timeline पर सजाते है
दोस्तों को छत के  बदले, chat पर  तलाशते है !
खूबसूरत सी इस ज़िंदगी को हम Andriod में कैद किये जाते है !








Tuesday, 11 April 2017

बेटियां

रोक लो इन्हे,   की ये क्यों बड़ी हुई जाती है ?
वक़्त से भी तेज़ रफ़्तार ये क्यों ही लिए जाती है !

गोद और पालने से न जाने कब
 डोली तक चली जाती है !

कोई तो रोक लो , ये गुड़िआ  हमारी कैसे लड़की बनी  जाती है ,
खिलौनों और किताबो से कब  बोझ भी उठाना सीख जाती है

हाय ये हमारी लाडो क्यों बड़ी हुई जाती है



Thursday, 6 April 2017

तुम जो नहीं हो साथ

Sunday, 19 February 2017

 तनहा कर हमें  वह हसीं  मुकाम दे गए !
इस नाचिज़  को उसकी ज़मीन उसका आसमान दे गए  !!

Thursday, 16 February 2017

वैलेंटाइन डे स्पेशल

चाहिए जिन्हें मोहब्बत तू उन्हें बखूबी दे
दौलत शोहरत की तू न कभी कमी दे !!
बनाने दे ख्वाईशो के महल लोगो को  बेहतरीन

         मुझे मेरे मौला  तू दो वक़्त की रोटी दे !

मिनाक्षी

Tuesday, 10 January 2017

शिक़वा शिक़ायतों का शोर है दर पे तेरे
उम्मीदों  की कतार  है ! 

दबी जुबां हमने भी लिख दी है अर्ज़ी अपनी
फुरसत में पढ़ना 
"शुक्रिया" लिखा है !!
तेरी दी हुई इस  
मेहरबाँ ज़िन्दगी का !

Sunday, 8 January 2017

Anamika

गुड़ियों  से खेलते ,माँ के आँचल  में छुपते छुपाते
वक़्त ने खड़ा किया तुम्हे ससुराल  की दहलीज़ पे !

किसी  ने मुस्कराहट देखि, तो किसी ने आँखों की कोर  ,
हम तो  खुश हो लिए पकड़ कर आपके  लहँगे का एक छोर !

वक़्त और हालात से बखूबी लड़ते
 निभाई तुमने हर रस्म और परंपरा !

कभी बहु, कभी भाभी  , फिर हमारे सुने आँगन में दो फूल खिला
महकाया हमरा सर्वस्व,बहाया वह मधुर अमृतधारा

नहीं लुप्त होने  दिया अपने नारीत्व को एक  आँगन के भीतर
अपने अनन्त के साथ इस विश्व में लहराया अपने अस्तित्व का पंचम !

वेद और पुराण की ज्ञाता बनी
अपनी लेखनी से रच दिया एक नया पुराण
और साबित किया अपना असीम तेज़ और ज्ञान

अपनी पदवी से साकार किया अपना कुलनाम ,  
नहीं खोने दिया फिर भी बहुरानी का उपनाम !







Tuesday, 3 January 2017

बदल गए हो तुम

सुनो, वह तुम्ही हो न , जो सँभालते थे मेरे डगमगाते कदम
        तुम्ही तो हो, जिसने हिम्मत कभी बंधाई थी !

ये क्या हुआ तुम्हारे चेहरे को, क्यों अपरिचित सा दीखता है !
आवाज़ वही,  फिर क्यों तुम्हारा हर गीत अब अनमना सा लगता है !

सुना है सौदा कर आये हो अपने ईमान का
तभी तो कहु , क्यों ये रिश्ता स्याह लगता है!