"Kuch Meri Kalam Se....."
Thursday, 6 April 2017
तुम जो नहीं हो साथ
तुम जो नहीं हो साथ , तो खुद में ढूंढ लेती हूँ तुमको , अपने बालों में फेर अपनी उँगलियाँ महसूस करती हूँ तुम्हारा स्पर्श
जो गुदगुदा जाती है मुझे अब भी !
चाय की प्याली मेज पर रखती हूँ जब, उसकी आंच से पिघल जाती है वह कुछ
तुम्हारी वालीजगह अब सुख गयी है
अपनी प्याली ही रख देती हूँ वहां , थोड़ी नमी उसे भी मिल जाती है
अलमारी में तुम्हारा कोना खाली सा है ,पर अब भी जब पुराने कपडे सहेजती हूँ जब
तो तुमसा कही महक सा जाता है
बहुत समेटा है खुद को, और बंद भी किया है खिड़कियों को, फिर भी कभी कभी मन बहक सा जाता है !!
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment