रोक लो इन्हे, की ये क्यों बड़ी हुई जाती है ?
वक़्त से भी तेज़ रफ़्तार ये क्यों ही लिए जाती है !
गोद और पालने से न जाने कब
डोली तक चली जाती है !
कोई तो रोक लो , ये गुड़िआ हमारी कैसे लड़की बनी जाती है ,
खिलौनों और किताबो से कब बोझ भी उठाना सीख जाती है
हाय ये हमारी लाडो क्यों बड़ी हुई जाती है
वक़्त से भी तेज़ रफ़्तार ये क्यों ही लिए जाती है !
गोद और पालने से न जाने कब
डोली तक चली जाती है !
कोई तो रोक लो , ये गुड़िआ हमारी कैसे लड़की बनी जाती है ,
खिलौनों और किताबो से कब बोझ भी उठाना सीख जाती है
हाय ये हमारी लाडो क्यों बड़ी हुई जाती है