Tuesday, 11 April 2017

बेटियां

रोक लो इन्हे,   की ये क्यों बड़ी हुई जाती है ?
वक़्त से भी तेज़ रफ़्तार ये क्यों ही लिए जाती है !

गोद और पालने से न जाने कब
 डोली तक चली जाती है !

कोई तो रोक लो , ये गुड़िआ  हमारी कैसे लड़की बनी  जाती है ,
खिलौनों और किताबो से कब  बोझ भी उठाना सीख जाती है

हाय ये हमारी लाडो क्यों बड़ी हुई जाती है



Thursday, 6 April 2017

तुम जो नहीं हो साथ