Tuesday, 10 January 2017

शिक़वा शिक़ायतों का शोर है दर पे तेरे
उम्मीदों  की कतार  है ! 

दबी जुबां हमने भी लिख दी है अर्ज़ी अपनी
फुरसत में पढ़ना 
"शुक्रिया" लिखा है !!
तेरी दी हुई इस  
मेहरबाँ ज़िन्दगी का !

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