उस कारीगर ने तो जन्नत ही बनाया था,
हिंदुस्तान और पाकिस्तान बना डाला हमने जिसे!
दिल उसका दुखता है, रक्त कही बहता है जब,
ईश्वर या रब जिसे कहते है हम !
फकीरो की बस्ती में सुकून है,
और रईसों की हवेली में जूनून,
क्या मौलवी क्या पंडित
आज कहाँ है ईमान और कहाँ दस्तूर !
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