Monday, 1 August 2016

थक जाओ जब

जो खुद से नाराज़ होना तुम कभी ,
हमसे दो शब्द बतिया लेना


 थक जाओ जब जेठ की तपती  धुप से 
तो अमवा की गाछी में सुस्ता लेना

उलझ जाओ गर  ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव में
तो समय से उसको सुलझवा लेना

आगे बढ्ने की जल्दी में  निकल जाओ जब सबसे आगे
और  हम जब  रह जाये कुछ पीछे

प्यार का वास्ता  देकर हमको फिर बुलवा लेना

जब तनहा पड़  जाओ भीड़ में भी, तब हमसे दो शब्द बतिया लेना



6 comments:

  1. Sooo engrossing 😊 Love to always read/listen wat u write

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  2. This comment has been removed by a blog administrator.

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  3. ये दो शब्द तो जी क़ातिल से बेहतरीन हैं ।
    मेरे तरफ़ से पार्टी

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