Monday, 22 August 2016

आँखों के आगोश में सिर्फ अश्क़ रह गए है अब
   ख्वाबो को दफनाए काफ़ी वक़्त बीत गया


1 comment:

  1. आँखों की गिरह से आंसुओ को आज़ाद कर देंगे।
    तेरी सुनी पड़ी चश्म को ख़्वाबों से आबाद कर देंगे।
    तेरे अश्क़ों के समंदर से सींच कर,
    तेरी आरज़ूओं के क़ब्रिस्ताँ को गुलज़ार कर देंगे। A novice attempt. :)

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