कई लोग मंडी तब जाते है जब बाज़ार उठ रहा हो ,
जब दुकानदार को जल्दी हो निपटाने की और घर जाने की !
अपने लगाए दामो पर झोली भर, अपने होशियारी पे इतराते है
आज सौदा अच्छा रहा ये सोच कुछ और छोटे हुए जाते है। ..
वही लोग अक्सर बड़े दुकानों में ठगे जाते है और मुस्कुराते है
इस भ्रम में की वह कुछ और बड़े हुए जाते है
अजीब ही दस्तूर अजीब ही संस्कार , अजीन ही व्यवहार :)
जब दुकानदार को जल्दी हो निपटाने की और घर जाने की !
अपने लगाए दामो पर झोली भर, अपने होशियारी पे इतराते है
आज सौदा अच्छा रहा ये सोच कुछ और छोटे हुए जाते है। ..
वही लोग अक्सर बड़े दुकानों में ठगे जाते है और मुस्कुराते है
इस भ्रम में की वह कुछ और बड़े हुए जाते है
अजीब ही दस्तूर अजीब ही संस्कार , अजीन ही व्यवहार :)
That's true ;)
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