कुछ इतनी तो रहमत कुदरत ने की होती १!
की ये चोट गैरों ने दी होती !
टीस तो फिर भी उठती इस घाव से
जुबां से तब आह तो निकलती !!
उसे कभी महसूस होगा तो जरूर ,
ये फरियाद कभी कबूल तो होगी
की ये चोट गैरों ने दी होती !
टीस तो फिर भी उठती इस घाव से
जुबां से तब आह तो निकलती !!
उसे कभी महसूस होगा तो जरूर ,
ये फरियाद कभी कबूल तो होगी
No comments:
Post a Comment