Thursday, 22 September 2016

चाय की अभिलाषा

चाह  नहीं की मैं कैफ़े डे में  ही रोज़ जाऊ ,
चाह नहीं की चायोस में जाकर फालतू का बिल बढ़ाऊ !!

चाह नहीं की स्टारबकस में बैठ अपने भाग्य पे इतराऊं !

मुझे ले जाना अये  दोस्त बिठा देना मुझे वहां ,
 कुल्लहड़ की चाय पीने,  जाते हो चाय के प्यासे
लोग अनेक जहाँ !!


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