Saturday, 1 August 2026

अब जरुरी है मेरा खुद से रिश्ता बनाना

बहुत जरुरी है अब मेरा और तुम्हरा अजनबी बन जाना 

जरुरी है अब शुन्य से नई शुरुआत करना

जहाँ ना हम हुनर जाने न ऐब , न सोच से वास्ता हो न समझ की उम्मीद  ,

की चले हम रास्तो पर एक साथ, पर मंजिल एक न हो हमारी 

जो  कभी टकरा जाये तो बस मुस्कुरा कर हाल पूछ ले 

और फिर चल पड़े राहों पर अपने अपने 

बहुत जरुरी है आगे पीछे का सब भूल जाना 

हरे घाव और मलहम भी भुला देना 

 तकाज़ा है अब वक़्त का 

एक नए  सिरे से समझना , और न समझे तो फ़िर  अजनबी ही रह जाना।  

अब जरुरी है मेरा खुद से रिश्ता बनाना , 




Monday, 13 July 2026

साक्षात्कार

  हम और तुम, एक कमरे में

आमने सामने , तुम कुछ सहमे हुए , मैं कुछ आशंकित 

मैंने ही पहल की।, चाय पियोगे? जरूरी नहीं था , पर तुम्हें ऐसे परेशान देख नहीं पाई !

तुमने सर हिलाया , थोड़ा आश्वस्त होकर एक घूंट  पानी का पिया !

अब तक कुछ सवाल मेरे मन में कौंध गए , क्या शौक है तुम्हारे ?  

अकेले ही रहना पसंद करते हो या दोस्त है तुम्हारे? 

अच्छा ये बताओ, क्यों कहीं ठहराव नहीं दिया? क्या सारी  गलती उनकी थी? 

या तुमसे भी कुछ चूक  गया?  

तुम कहते गए अपनी कहानी और मैं जानती गई तुम्हें थोड़ा और. 

तो क्या काफी है ये ?मैं नहीं जानती तुम नाराज़ कब होते हो? की तुम नाकामयाबी को कैसे झेलते हो? 

की तुम असंतुष्ट होगे  जब, तो क्या बता पाओगे मुझे? या चले जाओगे चुपचाप यूँही? 

कैसे पूछूँ  कि जो कह रहे हो सच है या झूठ , कि ये सिर्फ आज की बात है या ऐसे ही रहोगे? 

कैसे सौंप दूँ इतना कुछ तुम्हारे हवाले , कि थोड़ा और मिल ले? पर समय है क्या मेरे और तुम्हारे पास? 

ये रीत जो है न इसको थोड़ा तो बदलना होगा, हमें एक दूसरे को कुछ और समझना होगा 

साक्षात्कार  को व्यक्तिगत समझ से  जोड़ना होगा 

मिनाक्षी 








Wednesday, 24 June 2026

तब रहा नहीं गया

 तब रहा नहीं गया 

 उसके कोमल होंठ थर थरा  रहे थे जब , आंखों  से निकले उसके आंसू का बोझ सहा नहीं गया!

 छीनी जा रही थी जब उसकी आज़ादी और घूँघट में कर रहे थे कैद, तब रहा नहीं गया !

जिसे लाड़ से गोद में खेलाया था ,उसके अरमानो को कैद होते देख, 

बस रहा नहीं गया 

माँ के निशब्द बातों को उनके आँखों से छुपाया नहीं गया , 

मर्यादा के आड़ में शोषण का रूप सहा नहीं गया !

रिश्ता जो बांधा था सात फेरो से, उसको सिर्फ रिवाज़ो में तौला जाना स्वीकारा नहीं गया,

समाज के डर से घृणित विचारों  को पहनावा नहीं दिया !

विदा किया था जिसे नाज़ से , उसे उसी इज़्ज़त से वापस लाने का जिम्मा बखूबी  उठाया गया ! 

आज के बदलते परिवेश में संकुचित विचारधारा  को देख बस रहा नहीं गया!

मिनाक्षी 



Friday, 22 May 2026

घोंसला

 
घोसला बना अपना, किसी कोने में हमें अपने वजूद से रूबरू कराती है, 
हम अनसुना अनदेखा न कर दे  इन्हे, तो ची ची ची कर अपनी  उपस्थिति दर्ज कराती है 

मैं चाहती थी बुलाना इन्हें कई बार, दाना भी  डाला, पानी रख घड़े में इंतज़ार किया 
पर आना इन्होने इस बार ही ठाना था.

चुग कर दाना, और कुछ बूंदों से तर कर गला अपना,
झटपट  उड़ जाती है फिर, कुछ तिनको की तलाश में 

कभी बहुत ही उत्तेजित हो हलके आहट से भी 
अपनों नन्हे चिड़ो को खुद में छुपा लेती है !

समय के साथ फिर खुद ही उन्हें खुले आसमान में छोड़ आती है, 

और वह घोंसला, उसका तिनका हमारे बरामदों में बिखेर जा उड़ती हैं किसी और डाली , 
बटोर कर सारे  तिनके, नए घोसले के इंतज़ार में। .... मिनाक्षी 





बातचीत

ऐसा नहीं बात होती नही अब तुमसे, होती है ना , 

बात होती है मौसम की , हाँ पर बारिश की नही, जहाँ हम चाय पीते साथ में, 
बात होती है, क्या हाल है, सब ठीक ना ?ये पूछ लेते हैं, हाँ, पर सही हाल-ए-दिन बताते नहीं हम। 

कभी उलझनों में फंस जाऊँ  तो तुरंत हल निकाल लेते हो तुम, 
हाँ, पर हाँथ पकड़कर "सब ठीक हो जाएगा" ऐसा कुछ कर पाते नहीं अब. 

त्योहारों पर बात हो जाती है अक्सर, बधाईया भी दे देते है हम 
हाँ पर मेरे जन्मदिन पर मेरे पसंद का तोहफा तुम लाते नहीं अब! 

हम साथ है  एक ही शहर में, पर चाँद एक साथ देख पाते नहीं हम!

दोस्त हमारे पूछ लेते है हाल हमारा साथ में, पर हमें साथ अब देख पाते नहीं अब !

मिनाक्षी 



Wednesday, 20 May 2026

एक बार फ़िर


एक बार फ़िर 

आज आपके जन्मदिन पर एक ही ख़्वाइश सी होती है 

की काश एक  बार फिर आपसे मिल पाते, 

की एक बार आपको फिर देख पाते  आपके हाथों का स्पर्श महसूस कर पाते। 

हमारे घर की घंटी फिर बजती और आप जोर से आवाज़ लगाते , "कहा है भोपाली,? बच्चे  उसे सुन थोड़ा चहक जाते, 

और माँ बस एक बार फिर खुश  हो, थोड़ा सज जाती !

 अधूरा मन चाहता है की काश एक बार फिर आप हमे पुचकार  लेते , "अरे तो क्या हुआ , फिर हो जायेगा " ऐसा कह हमारे हारे  मन को जीता देते !

आपके लिया फुआ शायद घर आ जाती और आपकी कलाई पर कितनी राखियां बंध  जाती।  बहुत सालों से मिले नहीं जिनसे वह दोस्त और रिश्तेदार भी हमारे घर जमघट लगा जाते।  

आप एक बार फिर हमें मना  लेते, कुछ सबक जो सीखा आपके न होने पर, दुनियादारी के वह पाठ आप खुद ही पढ़ा जाते।    

आपके लगाए पौधों में फूल आ गए  है अब पापा, और पटना के घर में आम टूटने को तैयार है, आप एक बार हमारे  साथ वह स्वाद फिर चख जाते , 

कुछ बातें अधूरी ही रह गयी,   हम लोग आपको "पापा आप सबसे अच्छे  है" ये एक बार और कह पाते , बहुत सी sorry और बहुत सारा thanku कहना रह गया , इस बार जरूर सब कह जाते, पापा बस एक बार आप आ जाते , इस बार सिर्फ हमारे लिए, आप लिखे थे न की हम सब अब पटना चलेंगे साथ रहेंगे , तो वह आपका सपना एक बार पूरा कर पाते , एक बार बस एक बार आप फिर आप हम सबसे मिल पाते 

हम थक जाते है कभी कभी , आप हमारा हौसला एक बार फिर बढ़ा देते,    आपके इस 75th  birthday पर पापा हम सिर्फ यही प्रे करते है, भगवन सबको आप जैसे पापा दे , पर आपको हर जनम में सिर्फ हमारे लिए दे.