तब रहा नहीं गया
उसके कोमल होंठ थर थरा रहे थे जब , आंखों से निकले उसके आंसू का बोझ सहा नहीं गया!
छीनी जा रही थी जब उसकी आज़ादी और घूँघट में कर रहे थे कैद, तब रहा नहीं गया !
जिसे लाड़ से गोद में खेलाया था ,उसके अरमानो को कैद होते देख,
बस रहा नहीं गया
माँ के निशब्द बातों को उनके आँखों से छुपाया नहीं गया ,
मर्यादा के आड़ में शोषण का रूप सहा नहीं गया !
रिश्ता जो बांधा था सात फेरो से, उसको सिर्फ रिवाज़ो में तौला जाना स्वीकारा नहीं गया,
समाज के डर से घृणित विचारों को पहनावा नहीं दिया !
विदा किया था जिसे नाज़ से , उसे उसी इज़्ज़त से वापस लाने का जिम्मा बखूबी उठाया गया !
आज के बदलते परिवेश में संकुचित विचारधारा को देख बस रहा नहीं गया!
मिनाक्षी
"बेहतरीन और बेहद प्रभावशाली 👏 समाज की संकुचित विचारधारा और कुप्रथाओं पर करारा प्रहार करता हुआ हर एक शब्द दिल को छू गया दी "
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