Wednesday, 24 June 2026

तब रहा नहीं गया

 तब रहा नहीं गया 

 उसके कोमल होंठ थर थरा  रहे थे जब , आंखों  से निकले उसके आंसू का बोझ सहा नहीं गया!

 छीनी जा रही थी जब उसकी आज़ादी और घूँघट में कर रहे थे कैद, तब रहा नहीं गया !

जिसे लाड़ से गोद में खेलाया था ,उसके अरमानो को कैद होते देख, 

बस रहा नहीं गया 

माँ के निशब्द बातों को उनके आँखों से छुपाया नहीं गया , 

मर्यादा के आड़ में शोषण का रूप सहा नहीं गया !

रिश्ता जो बांधा था सात फेरो से, उसको सिर्फ रिवाज़ो में तौला जाना स्वीकारा नहीं गया,

समाज के डर से घृणित विचारों  को पहनावा नहीं दिया !

विदा किया था जिसे नाज़ से , उसे उसी इज़्ज़त से वापस लाने का जिम्मा बखूबी  उठाया गया ! 

आज के बदलते परिवेश में संकुचित विचारधारा  को देख बस रहा नहीं गया!

मिनाक्षी 



1 comment:

  1. "बेहतरीन और बेहद प्रभावशाली 👏 समाज की संकुचित विचारधारा और कुप्रथाओं पर करारा प्रहार करता हुआ हर एक शब्द दिल को छू गया दी "

    ReplyDelete