Tuesday, 9 February 2016

बाबुल

बाबुल


धन धान्य  होता है बाबुल ,
नाज़ों से पालता हैं
बाँहों की गोद  में सुलाता हैं

अपने पलकों में सपने, उसके सजाता है
और जब हम कदम हो जाती है बेटियां
फिर उन्हें
रेशम और फूलों से  सजाता है
हीरे  से स्वारता है
 दे जाती है बदले में अनमोल मोतियाँ
हथेली पे वह बाबुल दुलार से संभालता है.


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