तुम्हारा प्यार जैसे , पहली बरसात
जैसे गहरी निराशा में भी एक आस
जैसे कच्ची अमिया, या हो जैसे मिश्री की मिठास
हो चिलचिलाते धूप में जैसे पेड़ की छाँव
तुम्हारा प्यार जैसे पूस की रात में दूर सुलगती हुई आग,
या हो जैसे बिन मांगी मुराद !
तुम्हारा प्यार जैसे लता के गीत
हो जैसे लगभग हारती हुई जीत !
तुम्हारा प्यार मेरा पूरा श्रृंगार
मिनाक्षी .
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