सख्त उँगलियाँ उसकी नरम से गुलाब की पंखुरियों से लिपटी रहती है दिन भर
आधे सोये आँखों में उम्मीद चमक जाती है जब उसका गुलाब नए साफ़ मुलायम उँगलियों में जा सबको छलता है
कल फिर नयी सुबह ,नया गुलाब , सख्त हथेलियों में जकड , नरम उँगलियों की तलाश में निकलेगा
इन हथेलियों कलम और कागज़ पकड़वाने की चाहत रखती हूँ !
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