मतलबी दुनिया में खुदगर्ज़ चेहरे हैं
ख़ुशी में संग तो गम में अकेले हैं
फीकी मुस्कान हैं होंठों पर
झूठी बातों का सफर हैं
जहाँ गलियां खत्म हो खवाइशों की
वहीं रिश्तों का भी अन्त हैं
ढूंढने से भी नहीं मिलती हैं मंजिल
जिसकी मुझे तलाश हैं
रास्ते तो अनगिनत फिर भी दरमियाँ हैं
khoob likhti ho Ms. Shyra
ReplyDeleteAur tum tarif kahi badhkar karti Ho... Luv u darling
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