छुप्पन छुपाई में धप्पा करना
आंखमिचौली में कदम गिनना
ऊच नीच का पापड़ा
या पिट्ठो को ठोकना
कहीं खो गये हैं इनके अस्तित्व किसी अँधेरी कोठरी में
खेलते तो अब भी हैं हम
कहीं दिल से कहीं जज्बातों से
कदम डगमगाते है अब भी
कभी खुद को सँभालने में
कभी दुसरो को गिराने में
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