संसार का सेंसेक्स आज सुना गर्म हैं
वक़्त कीमती और लम्हे फ़िज़ूल हैं
तिजोरिया हो रही सख्त और रिश्ते ग़मगीन हैं
मंदिरों में भी अब टंग गयी लोहे की ज़ंज़ीर है
सुना है आज बाज़ार काफी मर्महीन हैं
सुना है आज बाज़ार काफी मर्महीन हैं
मिज़ाज़ और मौसम में होर लगी है बदलने की
उसूल की कीमत गिर गयी , जीत बुलंद है
पहले बेर चुराते थे बागो से
आज नज़रे चुराते है भगवान से
कुछ पाप खुदरे और कुछ संगीन है
सुना है आज बाज़ार काफी मर्महीन हैं
आधुनिक समाज का सुन्दर चित्रण है ये ||
ReplyDeleteपूंजीवादी बाज़ार मर्म हीन ही होता है | जब बाजार का जन्म ही स्वार्थ के लिए होता है तब उसमे रिश्ते नही हित देखा जाता है | और ऐसे बाज़ार में उसूल नहीं जीत ही सर्वोपरि होती है |
आधुनिक समाज का सुन्दर चित्रण है ये ||
ReplyDeleteपूंजीवादी बाज़ार मर्म हीन ही होता है | जब बाजार का जन्म ही स्वार्थ के लिए होता है तब उसमे रिश्ते नही हित देखा जाता है | और ऐसे बाज़ार में उसूल नहीं जीत ही सर्वोपरि होती है |