Friday, 24 July 2015

बाजार

   संसार  का सेंसेक्स  आज  सुना  गर्म हैं 
वक़्त  कीमती और लम्हे फ़िज़ूल हैं 


तिजोरिया  हो रही सख्त और रिश्ते ग़मगीन हैं 
मंदिरों में भी  अब टंग  गयी  लोहे की ज़ंज़ीर है 
सुना है आज बाज़ार  काफी   मर्महीन  हैं 


मिज़ाज़   और  मौसम  में होर लगी है बदलने की   
उसूल  की कीमत  गिर गयी , जीत  बुलंद है 


पहले बेर चुराते थे बागो  से 
आज नज़रे  चुराते है  भगवान से 
कुछ  पाप  खुदरे और कुछ संगीन है 

सुना है आज बाज़ार  काफी   मर्महीन  हैं 







2 comments:

  1. आधुनिक समाज का सुन्दर चित्रण है ये ||

    पूंजीवादी बाज़ार मर्म हीन ही होता है | जब बाजार का जन्म ही स्वार्थ के लिए होता है तब उसमे रिश्ते नही हित देखा जाता है | और ऐसे बाज़ार में उसूल नहीं जीत ही सर्वोपरि होती है |

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  2. आधुनिक समाज का सुन्दर चित्रण है ये ||

    पूंजीवादी बाज़ार मर्म हीन ही होता है | जब बाजार का जन्म ही स्वार्थ के लिए होता है तब उसमे रिश्ते नही हित देखा जाता है | और ऐसे बाज़ार में उसूल नहीं जीत ही सर्वोपरि होती है |

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