"Kuch Meri Kalam Se....."
Thursday, 14 January 2016
ख्वाइशें
संभाल के रख दिए तकिये के नीचे खाइश्ो को मैंने
कुछ ख्वाब में पुरे हो शायद
ये सोच पलके भी मूंद ली
1 comment:
Yogendra Tyagi
14 January 2016 at 04:14
ख्वाब पुरे करने के लिए ख्वाब देखना भी जरुरी है .
बिना ख्वाब देखे , कैसे पुरे हो ख्वाब !!
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ख्वाब पुरे करने के लिए ख्वाब देखना भी जरुरी है .
ReplyDeleteबिना ख्वाब देखे , कैसे पुरे हो ख्वाब !!