आ जाते हैं मयखाने में लोग
कुछ ग़म मिटाने को
कुछ शाम बिताने को
हमने भी कदम बढ़ाया है
एक जाम होठों से लगाया है
कुछ घाव पुराने खरोच कर खुद को उकसाया है
कुछ को इसी गहरी शाम में प्यार से दफनाया है.
कुछ ग़म मिटाने को
कुछ शाम बिताने को
हमने भी कदम बढ़ाया है
एक जाम होठों से लगाया है
कुछ घाव पुराने खरोच कर खुद को उकसाया है
कुछ को इसी गहरी शाम में प्यार से दफनाया है.
aisa hai kya ?
ReplyDeleteHanji😊
Deleteवाह जनाब ! तुम तो बस तुम हो
DeleteHanji��
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