फिर से
साहिल पर रेत कभी तपती है कभी सिलती है
छू कर उसे हर बार सागर युहीं चला जाता है
निर्जीव सी इस रेत पर घरौंदे लोग अपना बना जाते है
वह कभी बिखरता है कभी लहरों का हो जाता है
हर ढलती शाम के साथ रेत फिर सिलती है
नए घरौंदों के लिए ख़ुद को हर बार समेटती है .
छू कर उसे हर बार सागर युहीं चला जाता है
निर्जीव सी इस रेत पर घरौंदे लोग अपना बना जाते है
वह कभी बिखरता है कभी लहरों का हो जाता है
हर ढलती शाम के साथ रेत फिर सिलती है
नए घरौंदों के लिए ख़ुद को हर बार समेटती है .
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ReplyDeleteshakhsiyat unki kya hai ye wo nhi jaante
ReplyDeletezamaana hi puchh leta hai kya shakhsiyat hai tumhari
dilo se door hai aesa lage unhe
pta hi nhi ki hm unhe kitna hai mante
khumaar kalam ka hai ya aapka
ReplyDeleteye waakae sawaal hai
n astitv kalam me n dm aap me
jb n dono sath hai.....